Tuesday, January 22, 2008

*****कोई बात नही******

यही वफा का सिलाह है, तो कोई बात नही,
ये दर्द तुम ने दिया है, तो कोई बात नही,

यही बहुत है के तुम देखते हो साहिल से,
सफीना डूब रहा है, तो कोई बात नही,

रखा था अशियाना-ए-दिल मे छुपा के तुमको,
वो घर तुमने छोड दिया है तो कोई बात नही,

तुम ही ने आईना-ए-दिल मेरा बनाया था,
तुम ही ने तोड दिया है तो कोई बात नही,

किसे मजाल कहे कोई मुझ को दीवाना,
अगर ये तुमने कहा है तो कोई बात नही..............................

2 comments:

Raj said...

सम्मानीय प्रियंका जी
किसी का दुःख देख कर ना फिर तुम हंसोगे
खुदा की चाहात में तरप कर तो देखो

कयामात के बाद भी वो ना साथ छोरेगा
दामान खुदा का पकर कर तो देखो

जन्नात के रासाते उन के लिए खुलेगे
किसी दुखी दिल पर मर्हाम लगा कर तो देखो

तुम्हे हर खुशियाँ उस जहाँ की मिलेगी
खुदा की महफिल में आ कर तो देखो

ashish said...

i'm suffering same problem now to have no ability to reply in poetry.i say again you have great talent which is beyond to be describe in words.....
you often think that i use usual words again and again in your comment box which make your box so boring so i suggest you can delete my comment,i give comment to inform you what i think about our particular poetry,after reading you may delete it