Friday, August 3, 2007

*****गम की आदत*************



सितम सहने की आदत इस तरह कुछ हम ने डाली है,
चले आयें अभी गम और जगह दिल में खाली है,


अंधेरों में हमें रहने की आदत पड़ गई ऐसी,
हमें परवाह नहीं कि रात रौशन है कि काली है,


चलो कुछ तो मिला है आज उन से शुकरिया
उन कालबों से आई जो उन के लगे मीठी ये गाली है,
शऊर हम को नहीं, है इश्क की दीवनगी ऐसी
शकल उजबक सी दिखती है कि ज्यों कोई मवाली है,



दिलबर के राज़-ए-दिल बहुत ढूंढा किये लेकिन
छिपा कर के कहां रखी न जाने दिल की ताली है.