Thursday, June 21, 2007

*****सितम******


किये हम ने उन पर करम कैसे कैसे

सहे हम ने उन के सितम कैसे कैसे,


उफ़ न किया न ज़ुबां हम ने खोली

किये उन ने हम पे ज़ुलम कैसे कैसे,


सच ही समझते रहे झूठ उन के

रखे हम ने दिल में भरम कैसे कैसे,


जिस ने दिये हैं उसे क्या सुनाएं

मिले हम को संगीं अलम कैसे कैसे,


मर्दों को मालूम क्या औरतों के

दिल में छिपे हैं मरम कैसे कैसे ! ....................

3 comments:

BIMMY said...

होता है सितम जाबाजों पर
गैरों पे इनायत होती है...
इस जुल्म को उन से क्या कहिए
कहिए तो शिकायत होती है।

UttaM said...

Bahut acchaa likha hai..

Magar last ki do liney kuch alag hote..to mazaa aata..

jaise..

Ishq ko maaloom kya husn ke
dil mein chhupe maram kaise kaise..

Mera opinion hain..
Gustaakhi ho gayee ho to maaf karein..

ashish said...

vaise last ki line kisi naraiwadi sanghtan ko jaroor bhejiyega
use ye jaroor achchi lagengi
ho sakta hai aapko puruskar bhi mile
dont mind iam just joikng. and this is true men never undersatnd feelings of women heart.