Tuesday, October 23, 2007

*********सज़ा**********

ज़िन्दगी को ना बना ले वो सज़ा मेरे बाद
हौसला देना उन्हे मेरे खुदा मेरे बाद,

हाथ उठे हुए उनके ना कोई देखेगा
किस के आने की करेंगे वो दुआ मेरे बाद,

कौन घूंघट को उठायेगा सितामगर कह कर
और फिर किस से करेंग़े वो प्यार मेरे बाद,

फिर ज़माने मे मोहब्बत की ना परिस्तिश होगी
रोयेगी सिस्किया ले ले के वफा मेरे बाद,

वो जो कहता था की सिर्फ तेरे लिये जीता हूँ
उस का क्या जानिये क्या हाल होगा मेरे बाद........................

2 comments:

Raj said...

प्रियाजी

सजा का नाम प्यार-प्यार की सगी है सजा
खूबसूरत शायरी है प्यार की

"कौन घूंघट को उठायेगा सितामगर कह कर
और फिर किस से करेंग़े वो प्यार मेरे बाद,"

रुख्सत हुई तो मेरी बात मान कर गई
जो उसके पास था वो मुझे दान कर गई
बिछडी कुछ इस अदा से कि रितु बदल गई
वो ही थी जो इस सहर को वीरान कर गई
दिलचस्प हुई है अल-अजीज ये दोस्त
अप्ने मुफाद पर मुझे कुरबान् कर गई
इक अश्क भर गई जुदाई जिन्दगी में
मानो जफा से मुझपे एक एहसान कर गई
फालिद् में बात-बात में कहता था जिसे जान
वो ही आखिरी में रश्क बेजान कर गई
प्रियराज

ashish said...

excellent again priya ji
you have a great sense of emotions and have ability to convert that into words[shayari].i also think you have nice heart which is full of tender feelings and emotions because without it you wont be able to create such heart touching poetry.............