Friday, August 3, 2007

*****गम की आदत*************



सितम सहने की आदत इस तरह कुछ हम ने डाली है,
चले आयें अभी गम और जगह दिल में खाली है,


अंधेरों में हमें रहने की आदत पड़ गई ऐसी,
हमें परवाह नहीं कि रात रौशन है कि काली है,


चलो कुछ तो मिला है आज उन से शुकरिया
उन कालबों से आई जो उन के लगे मीठी ये गाली है,
शऊर हम को नहीं, है इश्क की दीवनगी ऐसी
शकल उजबक सी दिखती है कि ज्यों कोई मवाली है,



दिलबर के राज़-ए-दिल बहुत ढूंढा किये लेकिन
छिपा कर के कहां रखी न जाने दिल की ताली है.


16 comments:

LoveRaj said...

Priya Ji

Gum ki dunya se nikalo, koi to apka saathi hoga jisko dil ki taali ka pata hai ?
दिलबर के राज़-ए-दिल बहुत ढूंढा किये लेकिन
छिपा कर के कहां रखी न जाने दिल की ताली है.
Bahut hi tareef ke quabil hai ye rachna. Raj

Anonymous said...

bahut khooob.. kitni meethi hai kalaam aapki.. Kitna dard is seene me chupa rakha hai ...kash ye baant sakte!!!!!!!!!!!!!!!!!!
ashok

उन्मुक्त said...

जीना है तो, गम की तो आदत डालनी होगी। पर कभी सपनों में ही सही, ख्यालों में ही सही, कविता में ही सही, झूट ही सही - क्या खुशी मिलेगी।

ashish said...

aajkal aap nariyon par jyada likh rahi hain .aisa lagta hai.
bhaut khub likha hai

Shaile said...

Superb..

Khud ko kar itna buland ki khuda aake puche ki bataa teri razaa kya hai ?


keep it up...

love you
Shailesh

Anuj said...

nice words ... ..

looks like deep interest in writing..
i have interest in reading.. do blog some on my blog id ..


Anuj Tiwari
Montreal

UttaM said...

Bahut khoob likha hai Pitu,

Kabhi phoolon pe to kabhi titliyon pe nazar daaliye..

Gum ki nahi muskuraane ki aadat daaliye..


Saare aansoo sukha degi himmat..

Haalaat se mukaabale ki aadat daaliye..


Keep smiling.....
(Genuinely Uttam's)
www.genuinelyuttams.blogspot.com

Raj said...

कोई तो होगा आपकी जिन्दगी का मेहमान जो प्यार का तूफ़ान लाये

दिल की इस दहलीज तक जो मेहमा बन के आये
शाम की तन्हाइयों में उनकी उल्फ़त के ये साये
चन्द यादों का अब सहारा है प्यार का दर्द भी गवारा है

ईश्वर ने आपको दुनिया में गम के लिये नहीं खुश रहने को इस जमीं पर उतारा है कुछ प्यार की रस भरी रचनायें लिखियेगा

Raj said...

Priyanka Ji
दिलबर के राज़-ए-दिल बहुत ढूंढा किये लेकिन
छिपा कर के कहां रखी न जाने दिल की ताली है
You wrote these lines in August, 07 now I think, that after a month you have been searched out the KEY OF THE HEART which was hided in past at unkown place.
If not, please Post a new one about the [Key of Heart] so we may read your new feelings. I am your Fan and love Mere Nagme. "Priyraj"

Kunal said...

Priya ji main koi comment nahin likhunga..............
.................................

Raj said...

Priyanka Ji
Bahut sahe hain aapke dil ne gum, ab usme se piyar ki saugaat ka Izhar kariyga.
Priyraj

Raj said...

प्रिया जी
छुप गये वो जाकर कहीं शायद हमें सताने को,
लेकिन हम उनकी याद् में भूल गये जमाने को,
कोई उन्हे जाकर ये बता दे कि,
तरसते हैं हम उनकी एक झलक पाने को.

"प्रियराज"

Raj said...

प्रिया जी
काफ़ी दिनों से आपकी घायल कर देने वाली नई रचना का बडी बेसब्री से इंतजार है लिख दीजिएगा ना कोई दर्द भरी दास्तान......!
"प्रियराज"

Tanushri said...

प्रिया जी

ऐसी क्या खता हो गई हमसे कि 3 अगस्त के बाद को नई नज्म देखने को न मिली कुछ तो लिखिएगा

इन्त्जार में
प्रियराज

Raj said...

प्रिया जी
आजकल क्या हमसे कोई नाराजगी है कुछ तो नया लिखियेगा
यह है आपके लिएः

एक एक लम्हा दर्द बन के निकल रहा है
तुम्हारा चेहरा आंसू में भी खिल रहा है
क्यूं इतना तडफाती है जब ये याद आती है
एक ही लम्हे में सदियों का गम दे जाती है
न जी सके न मर सके क्यूं ऐसी जिन्दगी दी
गम ही देना था तो दो पल की भी क्यूं खुशी दी
तुम साथ ना हो कर भी हर पल मेरे ही साथ है
पर तुमसे गहरा रिश्ता मेरा इन गमों के साथ है
हर लम्हा हर पल यह मेरे साथ तो रहते हैं
जाऊं कितनी दूर मैं वे दिल से नही निकलते है

दिल को घायल करदे ऐसी पंक्तियां तो लिखो
"प्रिय्रराज"

Anonymous said...

Superb;
Heads down to you Priya Ji.
Mindblowing

Sneh