Wednesday, July 18, 2007

***लब कैसे ज़ाहिर कर दें *******

Jab Dil Me Kissi Ki Yaad Ka Diya Jal Utha Hai Toh,
Ek Mitthi Se Puhaar Ke Roop Me Dil Me Pyar Ki Barrish Karne Lagta Hai............

Pur Dil Darr Bhi Jata Hai, Ki Iss Pyar ki Barrish Me Kahi Koi Tufaan Na Aa Jaiyee,

Nacheez Ki Koshis Shayad Rang Laaye............








वो प्यार तो करना चाहते हैं पर करने से कतराते हैं
लब हिलते हैं कुछ कहने को पर कहने से शरमाते हैं,

पल भर को नज़र जो उठ जाये तो मिलते ही झुक जाती है
हम उन की अदाओं के सदके उन पर जी जान लुटाते हैं,

उन के हुस्न और नज़ाकत की तारीफ़ भला कैसे कीजे
वो इंसां हैं या कोई परी ये सोच के हम भरमाते हैं,

दिल की पुरज़ोर तमन्ना को उन पर ज़ाहिर कैसे कर दें
हो जायें खफ़ा न वो हम से यह सोच के हम रह जाते हैं,

इज़हार न हम कर पाते हैं राहों में गर मिल जायें
पर रातों की तनहाई में दिल में सौ ख्वाब सजाते हैं....................................

7 comments:

Kunal said...

Mind blowing priyanka ji...........
khaas karke ye line
"इज़हार न हम कर पाते हैं राहों में गर मिल जायें
पर रातों की तनहाई में दिल में सौ ख्वाब सजाते हैं...................................."

Ultimate
Keep it up................

AASHISH said...

KYA BAAT HAI .........

ji ..

Raj said...

*****प्यार की किश्ती से डरते हो, तो*****

हद ए गम ए हस्ती से, गुजर क्यों नहीं जाते,
प्यार में जीना नहीं आता, तो मर क्यों नहीं जाते

उस पार पहुंचना है, तो तूफां भी मिलेंगे
अगर डरते हो तो किश्ती से उतर क्यों नहीं जाते

UttaM said...

Very Nice..

Ijhar-o-ikraar ka silsila hi sangeen hai
Lab chahkar bhi keh nahi paate hain
Nazarein rokne se bhi reh nahi paate hain
Nazarein jo kehti hain, unko samajh to letin hain dilbar ki nazarein
Fir bhi izhaar ka intezaar kartin hain dhadkanein
(Genuinely Uttam's)

ashish said...

bahut khub priyanka ji ye shayri dil ko chu gayee.bahut se ashiqon ka yahi haal hai ja aapne bayan kiya hai.
keep it up............

ashish said...

priyanka ji
bithway i have been posted a comment already on it but i would like to tell you again that this is too sweet shayari.no words i have with which i praise you and your words.

मोहिन्दर कुमार said...

के बने ये नजर जुबां कैसे
के बने ये जुबां नजर कैसे
न जुंबा को दिखाई देता है
न निगाहों से बात होती है